| Paper Title |
दिनकर की ‘रश्मिरथी’ में कर्ण का आधुनिक स्वरूप |
| Author(s) | कोमल यादव. |
| Country | India |
| Abstract |
प्रस्तुत शोध-पत्र में रामधारी सिंह दिनकर की प्रसिद्ध प्रबंध काव्य रचना रश्मिरथी में चित्रित कर्ण के आधुनिक स्वरूप का विश्लेषण किया गया है। महाभारत के पारंपरिक आख्यान में कर्ण एक वीर योद्धा, दानवीर और दुर्योधन के निष्ठावान मित्र के रूप में प्रस्तुत होता है, किंतु दिनकर ने उसे केवल पौराणिक पात्र के रूप में नहीं, बल्कि आधुनिक सामाजिक चेतना के प्रतिनिधि के रूप में पुनर्सृजित किया है। इस अध्ययन में यह प्रतिपादित किया गया है कि ‘रश्मिरथी’ का कर्ण जन्माधारित सामाजिक व्यवस्था, विशेषतः जाति-व्यवस्था, के विरुद्ध प्रतिरोध का सशक्त प्रतीक है। दिनकर कर्ण के माध्यम से यह स्थापित करते हैं कि मनुष्य की श्रेष्ठता उसके जन्म से नहीं, बल्कि उसके गुण, कर्म और संघर्ष से निर्धारित होती है। कर्ण का चरित्र सामाजिक उपेक्षा, आत्मसम्मान, कृतज्ञता, दानशीलता और नैतिक द्वंद्व जैसे मानवीय आयामों से निर्मित है। उसके संवादों में सामाजिक विषमता के प्रति तीव्र आक्रोश और समानता की चेतना दिखाई देती है। साथ ही, दुर्योधन के प्रति उसकी निष्ठा, कुंती-संवाद और कवच-कुंडल दान जैसे प्रसंग उसके चरित्र के गहन मानवीय और नैतिक पक्ष को उद्घाटित करते हैं। समकालीन संदर्भ में कर्ण का व्यक्तित्व वंचित और उपेक्षित वर्ग की आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करता है। इस प्रकार ‘रश्मिरथी’ का कर्ण केवल एक पौराणिक नायक नहीं, बल्कि आधुनिक सामाजिक न्याय, मानवीय गरिमा और आत्मसम्मान की चेतना का प्रतीक बनकर उभरता है। |
| Keywords | जाति-व्यवस्था, सामाजिक न्याय, मानवीय गरिमा, नैतिक द्वंद्व, आधुनिक चेतना, दानवीरता, आत्मसम्मान। |
| Subject Area | हिन्दी साहित्य |
| Issue | Volume 1, Issue 1 (January - March 2026) |
| Published | 2026/03/02 |
| How to Cite | कोमल यादव (2026). दिनकर की ‘रश्मिरथी’ में कर्ण का आधुनिक स्वरूप. सबद पत्रिका, 1(1), 8–15. |
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