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सबद – शोध पत्रिका

सबद

राष्ट्रीय, सहकर्मी-समीक्षित (पीयर-रिव्यूड) त्रैमासिक शोध पत्रिका

  ISSN: 3139-5317 (Online)
ISSN: 3139-5325 (Print)

Call For Papers - Volume 1, Issue 3 (July - September 2026)
Paper Title

राष्ट्रीय आंदोलन और हिन्दी उपन्यासों में दलित चेतना

Author(s)शालिनी यादव
CountryIndia
Abstract

प्रस्तुत शोध–लेख में राष्ट्रीय आंदोलन और पूर्व–स्वाधीनता कालीन हिन्दी उपन्यासों में अभिव्यक्त दलित चेतना का विश्लेषण किया गया है। भारतीय समाज में जाति–व्यवस्था ने जहाँ सामाजिक संरचना को व्यवस्थित किया, वहीं उसने अस्पृश्यता, बहिष्कार और मानवीय गरिमा के हनन को भी स्थायी रूप दिया। उन्नीसवीं शताब्दी के समाज–सुधार आंदोलनों से प्रारंभ होकर बीसवीं शताब्दी के राष्ट्रीय स्वाधीनता आंदोलन तक दलित प्रश्न सामाजिक से राजनीतिक विमर्श का विषय बन गया। इस परिवर्तन ने हिन्दी उपन्यासों को गहरे रूप में प्रभावित किया। प्रेमचन्द के ‘प्रेमाश्रम’, ‘रंगभूमि’, ‘कर्मभूमि’ और ‘गोदान’ में जातिगत शोषण, सामाजिक पाखंड और आत्मसम्मान की चेतना का यथार्थ चित्रण मिलता है। ‘प्रेमाश्रम’ में जाति-आधारित श्रम-विभाजन और प्रतिरोध, ‘रंगभूमि’ में प्रीतिभोज के माध्यम से समता का प्रतीकात्मक उद्घोष, ‘कर्मभूमि’ में शैक्षिक बहिष्कार तथा ‘गोदान’ में धार्मिक पाखंड की आलोचना ये सभी प्रसंग दलित चेतना के विविध आयामों को स्पष्ट करते हैं। इसी प्रकार जयशंकर प्रसाद के ‘कंकाल’ तथा पाण्डेय बेचन शर्मा ‘उग्र’ के ‘मनुष्यानन्द’ में भी जातिगत विषमता और सामाजिक संकीर्णता पर तीखा प्रहार किया गया है। अंततः यह सिद्ध होता है कि पूर्व–स्वाधीनता हिन्दी उपन्यासों में दलित चेतना केवल करुणा का भाव नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, समानता और मानवीय गरिमा की स्थापना का सशक्त साहित्यिक प्रयास है। राष्ट्रीय आंदोलन और हिन्दी उपन्यासों की यह चेतना परस्पर पूरक सिद्ध होती है।

Keywordsराष्ट्रीय आंदोलन, दलित चेतना, हिन्दी उपन्यास, जाति–व्यवस्था, सामाजिक समानता।
Subject Areaहिन्दी साहित्य
Issue Volume 1, Issue 1 (January - March 2026)
Published2026/03/05
How to Cite शालिनी यादव (2026). राष्ट्रीय आंदोलन और हिन्दी उपन्यासों में दलित चेतना. सबद (Sabad), 1(1), 23–29.
License
Copyright © 2026 The Author(s). This work is licensed under a Creative Commons Attribution 4.0 International License (CC BY 4.0).

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