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सबद – शोध पत्रिका

सबद

राष्ट्रीय, सहकर्मी-समीक्षित (पीयर-रिव्यूड) त्रैमासिक शोध पत्रिका

  ISSN: 3139-5317 (Online)
ISSN: 3139-5325 (Print)

Call For Papers - Volume 1, Issue 3 (July - September 2026)
Paper Title

अस्मिता का संकट और आत्मनिर्वासन की समस्या ‘अँधेरे में’ कविता के विशेष संदर्भ में

Author(s)डॉ. प्रदीप कुमार प्रजापति
CountryIndia
Abstract

मुक्तिबोध की कालजयी रचना 'अँधेरे में' केवल एक कविता नहीं,बल्कि आधुनिक भारतीय मध्यवर्गीय व्यक्ति के अंतर्मन का एक जटिल मनोवैज्ञानिक और समाजशास्त्रीय दस्तावेज़ है। प्रस्तुत शोध पत्र इस कविता के विशेष संदर्भ में मध्यवर्गीय बुद्धिजीवी के 'अस्मिता के संकट' और 'आत्मनिर्वासन' की समस्या का विस्तृत अन्वेषण करता है। पूंजीवादी व्यवस्था के भीतर पलने वाला मध्यवर्गीय बुद्धिजीवी सत्य को जानता है, किंतु अपनी सामाजिक सुरक्षा और पद-प्रतिष्ठा के छद्म आवरण को बचाने के लिए वह संघर्ष से कतराता है। यह पलायनवाद उसे आत्मनिर्वासन की ओर धकेलता है, जहाँ वह अपनी ही पहचान (अस्मिता) खो बैठता है। यह शोध आलेख 'अँधेरे में' की फैंटेसी तकनीक, रहस्यमय पुरुष की उपस्थिति, और 'परम अभिव्यक्ति' की खोज के माध्यम से यह स्थापित करता है कि अस्मिता का वास्तविक अर्थ समाज से कटकर एकांत में जीने में नहीं, अपितु 'वर्गापसरण' के माध्यम से जन-संघर्षों में शामिल होने में है।

Keywordsमुक्तिबोध, अँधेरे में, अस्मिता का संकट, आत्मनिर्वासन, मध्यवर्गीय बुद्धिजीवी, फैंटेसी, वर्गापसरण, परम अभिव्यक्ति।
Subject Areaहिन्दी साहित्य
Issue Volume 1, Issue 3 (July - September 2026)
Published2026/09/17
How to Cite प्रदीप कुमार प्रजापति (2026). अस्मिता का संकट और आत्मनिर्वासन की समस्या ‘अँधेरे में’ कविता के विशेष संदर्भ में. सबद (Sabad), 1(3), 8–13.
License
Copyright © 2026 The Author(s). This work is licensed under a Creative Commons Attribution 4.0 International License (CC BY 4.0).

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