| Paper Title | तुलसीदास के काव्य में भक्ति और लोकमंगल की भावना |
| Author(s) | कृति पाण्डेय |
| Country | India |
| Abstract | यह शोध-पत्र तुलसीदास के काव्य में निहित भक्ति और लोकमंगल की भावना का विश्लेषण प्रस्तुत करता है। मध्यकालीन भक्ति आंदोलन की पृष्ठभूमि में तुलसीदास ने अपने काव्य के माध्यम से रामभक्ति को जनसामान्य तक पहुँचाने का महत्वपूर्ण कार्य किया। उनके साहित्य में भगवान राम के प्रति अनन्य प्रेम, समर्पण, श्रद्धा और दास्य भाव की अभिव्यक्ति मिलती है। तुलसीदास की भक्ति सगुण भक्ति परंपरा से संबद्ध है, जिसमें भगवान राम को मर्यादा, धर्म और आदर्श जीवन मूल्यों के प्रतीक के रूप में चित्रित किया गया है। तुलसीदास के काव्य की विशेषता यह है कि उसमें भक्ति के साथ-साथ लोकमंगल की व्यापक भावना भी विद्यमान है। उन्होंने अपने काव्य के माध्यम से धर्म, नीति, सदाचार, करुणा और परोपकार जैसे मानवीय मूल्यों की प्रतिष्ठा की तथा रामराज्य की कल्पना के माध्यम से एक आदर्श सामाजिक व्यवस्था का चित्र प्रस्तुत किया। इस प्रकार तुलसीदास की भक्ति व्यक्तिगत आध्यात्मिक साधना तक सीमित न रहकर समाज के नैतिक और सांस्कृतिक उत्थान का माध्यम बन जाती है। अतः यह स्पष्ट होता है कि तुलसीदास के काव्य में भक्ति और लोकमंगल का गहरा समन्वय है। उनके साहित्य में व्यक्त मानवीय आदर्श और नैतिक मूल्य हिन्दी साहित्य और भारतीय समाज के लिए आज भी अत्यंत प्रासंगिक और प्रेरणादायक हैं। |
| Keywords | तुलसीदास, भक्ति, लोकमंगल, रामभक्ति, रामचरितमानस, रामराज्य, नैतिक मूल्य, सगुण भक्ति, भारतीय संस्कृति। |
| Subject Area | हिन्दी साहित्य |
| Issue | Volume 1, Issue 1 (January - March 2026) |
| Published | 2026/03/02 |
| How to Cite | कृति पाण्डेय (2026). तुलसीदास के काव्य में भक्ति और लोकमंगल की भावना. सबद (Sabad), 1(1), 16–22. |
| License |
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