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सबद – शोध पत्रिका

सबद

राष्ट्रीय, सहकर्मी-समीक्षित (पीयर-रिव्यूड) त्रैमासिक शोध पत्रिका

  ISSN: 3139-5317 (Online)
ISSN: 3139-5325 (Print)

Call For Papers - Volume 1, Issue 3 (July - September 2026)
Paper Title

सूरदास के काव्य में बाल-कृष्ण का चित्रण

Author(s)कृष्णा यादव
CountryIndia
Abstract

सूरदास के काव्य में बाल-कृष्ण का चित्रण हिंदी भक्ति-काव्य की उन महत्त्वपूर्ण उपलब्धियों में है जहाँ ईश्वर का अलौकिक रूप पारिवारिक निकटता, मातृ-स्नेह और सहज बाल-व्यवहार के भीतर मूर्त हो उठता है। प्रस्तुत आलेख का केंद्रीय प्रश्न यह है कि सूरदास बाल-कृष्ण को केवल आराध्य देव के रूप में चित्रित करते हैं अथवा उनके माध्यम से बाल-मन, मातृत्व और घरेलू जीवन की ऐसी अनुभूतियों को भी अभिव्यक्ति देते हैं जो व्यापक मानवीय अर्थ ग्रहण करती हैं। ‘सूरसागर’ के विभिन्न बाल-लीला पदों के आधार पर कृष्ण के शैशव, घुटनों चलने, बोलने की प्रतीक्षा, चलना सीखने, हठ करने, स्पर्धा करने और बलराम से शिकायत करने जैसी अवस्थाओं का विश्लेषण किया गया है। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि सूर का वैशिष्ट्य चमत्कारपूर्ण कृष्ण-कथा की अपेक्षा सामान्य बाल-चेष्टाओं के सूक्ष्म निरीक्षण में अधिक दिखाई देता है। ब्रजभाषा की संवादधर्मिता, दृश्यात्मकता और घरेलू वातावरण इन चित्रों को जीवंत बनाते हैं। यद्यपि यह संसार आदर्शीकृत और कृष्ण-केंद्रित है, फिर भी मातृत्व और बाल-मनोविज्ञान की उसकी पहचान आज भी अत्यंत प्रासंगिक है।

Keywordsसूरदास, बाल-कृष्ण, वात्सल्य, बाल-मनोविज्ञान, यशोदा, सूरसागर, ब्रजभाषा।
Subject Areaहिन्दी साहित्य
Issue Volume 1, Issue 2 (April - June 2026)
Published2026/04/06
How to Cite कृष्णा यादव (2026). सूरदास के काव्य में बाल-कृष्ण का चित्रण. सबद (Sabad), 1(2), 8–13.
License
Copyright © 2026 The Author(s). This work is licensed under a Creative Commons Attribution 4.0 International License (CC BY 4.0).

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